सुरक्षा अपनाओ ,कोरोना भगाओ

                  सुरक्षा अपनाओ ,कोरोना भगाओ
 “ समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो , जीनी है जिंदगी तो आगे देखो “ दुनिया एक अदृश्य, घातक दुश्मन से जूझ रही है, यह समझने की कोशिश कर रही है कि वायरस द्वारा उत्पन्न खतरे के साथ कैसे जीना है। लॉक डाउन में जिंदगी के कड़वे अनभवों से सीख ले कर अनलॉक में हम प्रवेश कर चुके है।  अनलॉक को हम एक स्कूल के बच्चे की भांति छुट्टी की घंटी बजते ही बदहवास से इधर उधर घूमने लगे है हमारे चेहरे पर ना मास्क हैं और ना दो गज के दूरियों का ध्यान बस घर से ऐसे निकल पड़े है जैसे अनलॉक में कोरोना लुप्त ही हो गया हो। जब मैं काम से बाहर जाती हूँ तो कम से कम आधे लोग जो मुझे दिखते हैं वे मास्क नहीं पहने होते हैं - या फिर गले में मास्क पहने होते हैं जैसे ये कोई भाग्य को बढ़ाने वाली वस्तु हो। लोगो की लापरवाही एक आत्महत्या करने के सामान ही है जो सब समझते  हुए भी मास्क नहीं लगाता और खुद को मौत के मुँह में धकेल रहा है। एक व्यक्ति तम्बाकू ,सिगरेट ,शराब और मौजमस्ती पर पैसा खर्च कर सकता है परन्तु 20 रुपये का मास्क खरीदना उसके लिए असंभव होता है। किसी का साहसी होना अच्छा होता है परन्तु इस वायरस से बिना फेस मास्क के जंग लड़ना साहसीपूर्ण कार्य नहीं अपितु मूर्खता पूर्ण कार्य है। हर व्यक्ति इस महामारी से बचने के लिए वैक्सीन का इंतज़ार कर रहा है परन्तु इस वायरस से बचने के लिए सावधानी रखना भी पर्याप्त है  
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम गेब्येयियस ने 28 फ़रवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमें टीकों और चिकित्सा विज्ञान के लिए इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है, इन चीज़ों की मदद से हर व्यक्ति ख़ुद की और दूसरों की सुरक्षा कर सकता है."   
इस वायरस का खतरा दिन प्रतिदिन चरम सीमा पर पहुँच रहा है जबकि हर व्यक्ति को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है परन्तु कुछ लोग लापरवाही की हदें पार कर रहे है और अपने साथ -साथ लोगो को भी खतरे में डाल रहे है। हमे एक जिम्मेदार नागरिक की  भाति इस खतरे की घंटी को नज़र अंदाज ना करके अपने चेहरे को मास्क से ढक कर, दो गज की दूरिया बना कर और हाथो को बार-बार धोकर देश को कोरोना मुक्त कराना है जिसमे हम सबका सहयोग अनिवार्य है।   
कुछ संस्थाए मास्क बाँट कर वही कुछ यक्तिगत रुप से सोशल मीडिया के द्वारा जागरुकताअभियान चला कर मदद कर रहे हैं। मै भी अपनी टीम के साथ अपना कर्तव्य निभाने नोएडा के सेक्टर 50 में जा पहुँची वहाँ हमने कम से कम 50 माक्स बाटे परन्तु हम सभी यह देख कर चकित थे कि कुछ लोगो के पास मास्क होते हुए भी जेब में थे या कुछ अपनी गाड़ियों में ही भूल आये थे और बिना किसी भय के ऐसे सैर सपाटे में मसरुफ थे मानो  कोरोना वायरस जैसी कोई महामारी फैली ही ना हो। हमारे लिए दुख़द बात यह थी कि पढ़े लिखे व्यक्ति भी बिना मास्क के घूम रहे थे और उनको समझाना अपने गले में खतरे की घंटी बाँधने जैसा था उनको कहना उनके अहम को चोट पहुंचाने जैसा था फिर भी साहस जुटा कर विनर्मता से मास्क लगाने के लिए अनुरोध किया गया। हमने इस मुहिम में बच्चों के हाथ के  बने पोस्टर भी शामिल किये जिसमे बच्चो ने लोगो को सावधानियों का ध्यान रखने के लिए सन्देश दिए थे। हम लोगो को उन्हें दिखा कर भी समझाने का प्रयास कर रहे थे।हम सभी को एक बात की संतुष्टि थी कि इस जागरुकता अभियान के द्वारा अगर हम 1% लोगो को भी समझाने में सफल हो गए तो भी हमारा यह मिशन कामयाब है। 
             नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
             शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः ॥
ईस्वर ने सबसे बड़ी दौलत मनुष्य को स्वस्थ शरीर के रुप में दी है  जीवन को चलाने के लिए जो भी कार्य आवश्यक होते हैं। उन्हें करना ही पड़ता है।इसलिए कभी भी किसी भी कार्य से डरना नहीं चाहिए।उस कार्य को आप जितने अच्छे से कर सकते हैं, उसे करना चाहिए।
भारत के प्रधान मंत्री जी ने 30 जून को देश को संबोधित करते हुए लोगो से कहाँ " फिर से एक बार मैं आप सब से प्रार्थना करता हूँ, आपके लिए भी प्रार्थना करता हूँ, आपसे आग्रह भी करता हूँ , आप सभी स्वस्थ रहिए, दो गज की दूरी का पालन करते रहिए, गमछा , फेस कवर, मास्क ये हमेशा उपयोग कीजिये, कोई लापरवाही मत बरतिए"

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